मोदी कैबिनेट 3.0 में मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाएं तेज, जानिए 2014 से अब तक कब-कब हुआ बड़ा फेरबदल

मोदी कैबिनेट 3.0 में मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाएं तेज, जानिए 2014 से अब तक कब-कब हुआ बड़ा फेरबदल

Delhi News: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल (मोदी कैबिनेट 3.0) में संभावित मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि केंद्र सरकार या भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ओर से अब तक किसी भी तरह के कैबिनेट विस्तार या फेरबदल की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन विभिन्न राजनीतिक घटनाक्रमों और संगठनात्मक बदलावों के बीच अटकलों का दौर लगातार जारी है।

माना जा रहा है कि केंद्र सरकार के कुछ मंत्रालयों में रिक्त पदों और बदलते राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए सरकार संगठन और प्रशासन के बीच संतुलन बनाने के उद्देश्य से व्यापक फेरबदल कर सकती है। उत्तर प्रदेश भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के बाद केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी के मंत्रिमंडल से बाहर होने की संभावना भी जताई जा रही है। यदि ऐसा होता है तो मंत्रिमंडल में एक और स्थान रिक्त हो जाएगा।

किन कारणों से तेज हुई मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाएं?

हाल के दिनों में केंद्र सरकार कई राजनीतिक और प्रशासनिक चुनौतियों का सामना कर रही है। नीट पेपर लीक मामले के बाद विपक्ष लगातार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहा है। इसके अलावा विभिन्न राज्यों से जुड़े मुद्दों पर भी विपक्ष सरकार पर हमलावर है।

राजनीतिक चर्चाओं में यह भी कहा जा रहा है कि दूसरी पार्टियों से भाजपा में शामिल हुए कुछ नेताओं को संगठन या सरकार में नई जिम्मेदारी मिल सकती है। वहीं नितिन गडकरी और निर्मला सीतारमण जैसे वरिष्ठ मंत्रियों के विभागों में बदलाव की भी अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि इन सभी संभावनाओं की अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और इन्हें केवल राजनीतिक अटकलों के तौर पर ही देखा जा रहा है।

2014: पहली मोदी सरकार में छह महीने बाद हुआ पहला विस्तार

26 मई 2014 को नरेंद्र मोदी ने पहली बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। शुरुआती मंत्रिमंडल में कुल 45 मंत्री शामिल थे और कई मंत्रियों के पास एक से अधिक विभागों की जिम्मेदारी थी।

इसके बाद 10 नवंबर 2014 को मोदी सरकार का पहला मंत्रिमंडल विस्तार किया गया। इस विस्तार में कुल 21 नए मंत्रियों को शामिल किया गया, जिनमें चार कैबिनेट मंत्री, 14 राज्य मंत्री और तीन स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री थे।

इसी विस्तार में जे.पी. नड्डा पहली बार कैबिनेट मंत्री बने, जबकि शिवसेना से आए सुरेश प्रभु को भी मंत्रिमंडल में शामिल किया गया और बाद में उन्हें रेल मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई। इसी अवधि में भाजपा और शिवसेना के रिश्तों में पहली बार सार्वजनिक स्तर पर खटास भी देखने को मिली।

2016: उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले हुआ दूसरा विस्तार

5 जुलाई 2016 को प्रधानमंत्री मोदी ने अपने पहले कार्यकाल का दूसरा कैबिनेट विस्तार किया। इस दौरान 19 नए राज्य मंत्रियों को मंत्रिपरिषद में शामिल किया गया, जबकि पांच मंत्रियों ने इस्तीफा दिया। प्रकाश जावड़ेकर को पदोन्नत कर कैबिनेट मंत्री बनाया गया।

इस विस्तार में उत्तर प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र को विशेष महत्व दिया गया क्योंकि कुछ महीनों बाद उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव होने थे। महेंद्र नाथ पांडेय, अर्जुन राम मेघवाल, रामदास आठवले, मनसुख मंडाविया, अनुप्रिया पटेल और फग्गन सिंह कुलस्ते सहित कई नेताओं को मंत्रिमंडल में स्थान मिला।

2017: चुनावी राज्यों को ध्यान में रखकर हुआ तीसरा विस्तार

सितंबर 2017 में मोदी सरकार का तीसरा मंत्रिमंडल विस्तार किया गया। इसमें नौ नए मंत्रियों को शामिल किया गया, जबकि चार मंत्रियों को पदोन्नत कर कैबिनेट मंत्री बनाया गया।

निर्मला सीतारमण, पीयूष गोयल, मुख्तार अब्बास नकवी और धर्मेंद्र प्रधान को कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिला। वहीं अश्विनी कुमार चौबे, गजेंद्र सिंह शेखावत, हरदीप सिंह पुरी और राजकुमार सिंह जैसे नेताओं को मंत्रिपरिषद में शामिल किया गया।

इस विस्तार में कर्नाटक, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे चुनावी राज्यों को प्राथमिकता दी गई। वहीं उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बनने के बाद महेंद्र नाथ पांडेय ने मंत्री पद छोड़ दिया।

जुलाई 2021 में हुआ अब तक का सबसे बड़ा मंत्रिमंडल विस्तार

30 मई 2019 को नरेंद्र मोदी ने दूसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली और शुरुआती मंत्रिमंडल में 57 मंत्री शामिल थे।

इसके बाद जुलाई 2021 में दूसरे कार्यकाल का पहला और अब तक का सबसे बड़ा मंत्रिमंडल विस्तार किया गया। इस दौरान 36 नए चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया, जबकि 12 मंत्रियों को हटाया गया।

मंत्रिमंडल से हटाए गए प्रमुख नेताओं में डॉ. हर्षवर्धन, रविशंकर प्रसाद, प्रकाश जावड़ेकर, रमेश पोखरियाल ‘निशंक’, सदानंद गौड़ा, संतोष गंगवार, बाबुल सुप्रियो और प्रताप चंद्र सारंगी शामिल थे।

मोदी कैबिनेट 3.0 में क्या हो सकता है?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि मोदी सरकार मंत्रिमंडल विस्तार करती है तो संगठनात्मक संतुलन, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व, आगामी विधानसभा चुनावों और सहयोगी दलों की भागीदारी को प्राथमिकता दी जा सकती है। जिन राज्यों में निकट भविष्य में चुनाव होने हैं, वहां के नेताओं को भी मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व मिलने की संभावना जताई जा रही है।

हालांकि किसे मंत्रिमंडल में जगह मिलेगी, किन मंत्रियों के विभाग बदले जाएंगे और किन नेताओं की मंत्रिपरिषद से विदाई होगी, इस पर अंतिम निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा नेतृत्व ही करेगा। जब तक सरकार की ओर से आधिकारिक घोषणा नहीं की जाती, तब तक मंत्रिमंडल विस्तार से जुड़ी सभी चर्चाओं को राजनीतिक अटकलों के रूप में ही देखा जा रहा है।

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