महिला आरक्षण पर मायावती का बड़ा बयान; ‘आधी आबादी’ को मिले आधा हक, SC/ST-OBC महिलाओं के लिए अलग कोटे की मांग

महिला आरक्षण पर मायावती का बड़ा बयान; ‘आधी आबादी’ को मिले आधा हक, SC/ST-OBC महिलाओं के लिए अलग कोटे की मांग

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने बुधवार को महिला आरक्षण बिल को लेकर केंद्र सरकार और संसद में होने वाली चर्चा पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए बड़ा बयान दिया। उन्होंने इस मुद्दे पर संसद का विशेष सत्र बुलाए जाने का स्वागत किया और इसे महत्वपूर्ण कदम बताया।

महिला सशक्तीकरण पर चर्चा ज्यादा, अमल कम

मायावती ने कहा कि देश में लंबे समय से महिलाओं के सशक्तीकरण को लेकर चर्चाएं होती रही हैं, लेकिन इन योजनाओं और नीतियों को जमीनी स्तर पर लागू करने में अपेक्षित गंभीरता और राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी रही है। उन्होंने चिंता जताई कि इसी कारण महिलाओं के साथ सामाजिक अन्याय, शोषण और हिंसा की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।

बसपा की 50 प्रतिशत आरक्षण की पुरानी मांग

बसपा प्रमुख ने दोहराया कि उनकी पार्टी महिलाओं को उनकी जनसंख्या के अनुपात में 50 प्रतिशत आरक्षण देने की मांग लंबे समय से करती रही है। उनका कहना है कि सभी वर्गों की महिलाओं को बराबरी का अवसर मिलना चाहिए, लेकिन विभिन्न राजनीतिक दल अपने स्वार्थ और मजबूरियों के चलते इस मांग को स्वीकार नहीं कर रहे हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संसद और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण की प्रक्रिया का बसपा समर्थन करती है, हालांकि इसे लागू करने में काफी देरी हुई है।

वंचित वर्ग की महिलाओं के लिए अलग प्रावधान की वकालत

मायावती ने यह भी कहा कि महिला आरक्षण में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग की महिलाओं के लिए अलग से आरक्षण की व्यवस्था की जानी चाहिए थी। उनका मानना है कि ऐसा होने पर समाज के सबसे कमजोर और वंचित वर्गों की महिलाओं को वास्तविक लाभ मिल सकता था और यह एक ऐतिहासिक कदम साबित होता।

डॉ. अंबेडकर के विचारों का किया उल्लेख

अपने बयान में मायावती ने हाल ही में मनाई गई संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस अवसर पर बसपा कार्यकर्ताओं ने अपने-अपने घरों में श्रद्धा और उत्साह के साथ उन्हें याद किया। मायावती के अनुसार, बाबा साहेब के विचार आज भी सामाजिक न्याय और समानता की दिशा में मार्गदर्शन करते हैं, और महिला आरक्षण जैसे मुद्दों पर उनकी सोच को ध्यान में रखना बेहद आवश्यक है।

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