
E20 Petrol को लेकर जनता में बढ़ी चिंता, C-Voter Survey में सामने आईं माइलेज और इंजन को लेकर बड़ी आशंकाएं
देश भर में E20 Petrol को लेकर बहस तेज हो गई है। केंद्र सरकार जहां 20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल वाले E20 ईंधन को बढ़ावा दे रही है, वहीं हाल ही में सामने आए C-Voter Survey ने इस मुद्दे पर जनता की अलग राय सामने रखी है। सर्वे के मुताबिक आम लोगों के साथ-साथ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के समर्थकों का एक बड़ा वर्ग भी अपनी गाड़ियों में E20 पेट्रोल का इस्तेमाल करने से हिचकिचा रहा है। लोगों की सबसे बड़ी चिंता गाड़ी की माइलेज में कमी और इंजन पर संभावित असर को लेकर है।
सरकार का उद्देश्य E20 पेट्रोल के माध्यम से कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना और पर्यावरण को लाभ पहुंचाना है। हालांकि, सर्वे के नतीजे बताते हैं कि फिलहाल लोगों का भरोसा इस नई व्यवस्था पर पूरी तरह नहीं बन पाया है।
आधे से ज्यादा लोग E20 पेट्रोल के पक्ष में नहीं
C-Voter के हालिया सर्वे के अनुसार, देश के करीब 55.1 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे अपनी गाड़ियों में E20 पेट्रोल नहीं डलवाना चाहते। इसके विपरीत केवल 17.1 प्रतिशत लोगों ने इसका समर्थन किया। इससे स्पष्ट होता है कि बड़ी संख्या में वाहन मालिक अभी भी इस ईंधन को अपनाने के लिए तैयार नहीं हैं।
NDA समर्थकों में भी दिखा विरोध
सर्वे का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि E20 पेट्रोल को लेकर असहमति केवल विपक्षी समर्थकों तक सीमित नहीं है, बल्कि सत्तारूढ़ गठबंधन NDA के समर्थकों के बीच भी इसे लेकर संदेह मौजूद है।
सर्वे के अनुसार 52.5 प्रतिशत NDA समर्थकों ने कहा कि वे E20 पेट्रोल का इस्तेमाल नहीं करना चाहते। वहीं केवल 18.1 प्रतिशत समर्थकों ने इसका समर्थन किया, जबकि 29.5 प्रतिशत लोगों ने इस विषय पर कोई राय नहीं दी।
दूसरी ओर, विपक्षी दलों के समर्थकों में 57.9 प्रतिशत लोगों ने E20 पेट्रोल के प्रति असहमति जताई।
माइलेज और इंजन को लेकर सबसे अधिक चिंता
सर्वे में यह भी जानने की कोशिश की गई कि आखिर लोग E20 पेट्रोल से दूरी क्यों बना रहे हैं। इसके जवाब में सबसे अधिक चिंता गाड़ी की माइलेज और इंजन की स्थिति को लेकर सामने आई।
करीब 52.8 प्रतिशत लोगों का मानना है कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से वाहन की माइलेज पहले की तुलना में कम हो सकती है। वहीं 54.2 प्रतिशत लोगों ने आशंका जताई कि इससे इंजन पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। इसके विपरीत केवल 10.9 प्रतिशत लोगों का मानना है कि E20 पेट्रोल से वाहन को कोई नुकसान नहीं होता।
पुरानी गाड़ियों को लेकर भी लोगों में चिंता
सर्वे में शामिल 56.3 प्रतिशत लोगों ने कहा कि पुरानी गाड़ियों के लिए E20 पेट्रोल को अनिवार्य बनाना उचित नहीं होगा। उनका मानना है कि जो वाहन E10 ईंधन के अनुरूप डिजाइन किए गए हैं, उनमें E20 पेट्रोल के उपयोग से भविष्य में तकनीकी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
पेट्रोल पंपों पर दोनों विकल्प उपलब्ध कराने की मांग
सर्वे के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने पेट्रोल पंपों पर सामान्य पेट्रोल और E20 पेट्रोल दोनों विकल्प उपलब्ध कराने की मांग की। आंकड़ों के अनुसार 75.9 प्रतिशत लोगों का कहना है कि वाहन मालिकों को अपनी गाड़ी की जरूरत और मॉडल के अनुसार ईंधन चुनने की सुविधा मिलनी चाहिए।
इसके अलावा 74.5 प्रतिशत लोगों की राय है कि यदि सरकार E20 पेट्रोल को बढ़ावा दे रही है तो इसकी कीमत सामान्य पेट्रोल से कम होनी चाहिए। हालांकि कीमत कम होने की स्थिति में भी केवल 40.8 प्रतिशत लोगों ने ही इसे अपनाने की इच्छा जताई।
सरकार के दावों पर जनता की राय
केंद्र सरकार का कहना है कि E20 पेट्रोल के उपयोग से कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होगी और देश की आर्थिक बचत भी होगी। इस दावे से 37.2 प्रतिशत लोग पूरी तरह सहमत नजर आए, जबकि 19.5 प्रतिशत लोगों ने आंशिक सहमति जताई। इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग अभी भी संभावित तकनीकी नुकसान की आशंका को इन दावों से अधिक महत्वपूर्ण मान रहे हैं।
8 और 9 जुलाई को किया गया सर्वे
यह आंकड़े C-Voter के स्नैप पोल पर आधारित हैं, जो 8 और 9 जुलाई के बीच आयोजित किया गया था। सर्वे में देशभर के 1,641 लोगों से फोन (CATI) के माध्यम से बातचीत की गई। सर्वे का मार्जिन ऑफ एरर मैक्रो स्तर पर ±3 प्रतिशत और माइक्रो स्तर पर ±5 प्रतिशत बताया गया है।

