
हापुड़ में भाकियू लोकहित के राष्ट्रीय प्रवक्ता हरीश हूण हाउस अरेस्ट, दलित छात्रा हत्याकांड के पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे थे मेरठ
Hapur News: मेरठ में चर्चित दलित छात्रा हत्याकांड को लेकर प्रदेशभर में सियासी और सामाजिक हलचल तेज हो गई है। इसी बीच भारतीय किसान यूनियन (लोकहित) के राष्ट्रीय प्रवक्ता हरीश हूण को शुक्रवार सुबह पुलिस ने उनके हापुड़ स्थित आवास पर ही हाउस अरेस्ट कर दिया। हरीश हूण मेरठ जाकर मृतक छात्रा के परिजनों से मुलाकात करने और उन्हें न्याय दिलाने का भरोसा देने वाले थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें घर से बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी। इस कार्रवाई के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
आवास के बाहर तैनात रहा भारी पुलिस बल
जानकारी के अनुसार, शुक्रवार सुबह से ही हरीश हूण के आवास के बाहर भारी पुलिस बल तैनात रहा। पुलिसकर्मियों ने उन्हें मेरठ जाने से रोक दिया, जिसके बाद संगठन के कार्यकर्ताओं में नाराजगी देखने को मिली। घटना की सूचना मिलते ही समर्थकों और किसान नेताओं के बीच इस कार्रवाई को लेकर चर्चा का दौर शुरू हो गया।
पीड़ित परिवार को सांत्वना देने जा रहे थे हरीश हूण
हरीश हूण ने कहा कि मेरठ में हुई दलित छात्रा की हत्या ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। उनका उद्देश्य शोक संतप्त परिवार से मिलकर उन्हें सांत्वना देना और यह भरोसा दिलाना था कि समाज तथा किसान संगठन उनके साथ खड़े हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि बिना किसी ठोस कारण के उन्हें उनके घर में ही नजरबंद किया गया है। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी नागरिक को पीड़ित परिवार से मिलने और संवेदना व्यक्त करने का अधिकार है, लेकिन प्रशासन ने उनके इस अधिकार का हनन किया है।
दलित छात्रा हत्याकांड को लेकर प्रदेशभर में बढ़ी हलचल
मेरठ में दलित छात्रा की हत्या का मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। घटना के बाद प्रदेशभर से राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न किसान संगठनों के प्रतिनिधि पीड़ित परिवार से मुलाकात कर रहे हैं। कई नेताओं ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग भी की है।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क नजर आ रहा है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से कई स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है।
हाउस अरेस्ट पर प्रशासन की कार्रवाई पर उठाए सवाल
हाउस अरेस्ट किए जाने के बाद हरीश हूण ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति का उद्देश्य केवल पीड़ित परिवार से मिलना और न्याय की आवाज उठाना है, तो उसे रोकना उचित नहीं है। उनके अनुसार यह लोकतांत्रिक मूल्यों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के विरुद्ध है।
भाकियू लोकहित से जुड़े कार्यकर्ताओं ने भी इस कार्रवाई पर नाराजगी जताई। उनका कहना है कि प्रशासन को जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों के लोगों को पीड़ित परिवार तक पहुंचने से नहीं रोकना चाहिए।
पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने का दिया हवाला
वहीं, पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मेरठ में बने संवेदनशील माहौल और कानून-व्यवस्था को बनाए रखने के उद्देश्य से एहतियातन यह कदम उठाया गया है। अधिकारियों के अनुसार किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति से बचने के लिए आवश्यक कार्रवाई की गई है। पुलिस का कहना है कि शांति व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसी को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया।

