Chandauli News: गेहूं खरीद पर युद्ध की मार: ईरान–इजरायल संघर्ष से बोरे की कमी, प्रशासन ने निकाला अस्थायी समाधान

Chandauli News: गेहूं खरीद पर युद्ध की मार: ईरान–इजरायल संघर्ष से बोरे की कमी, प्रशासन ने निकाला अस्थायी समाधान

Chandauli News: जनपद में इस वर्ष गेहूं खरीद व्यवस्था पर अंतरराष्ट्रीय हालात का सीधा असर देखने को मिल रहा है। ईरान–इजरायल युद्ध के चलते पेट्रोलियम पदार्थों की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिसका असर अब स्थानीय स्तर पर भी स्पष्ट नजर आ रहा है। खासतौर पर प्लास्टिक उद्योग पर पड़े इस प्रभाव के कारण गेहूं खरीद प्रक्रिया बाधित हो रही है।

पेट्रोलियम संकट से प्लास्टिक उद्योग प्रभावित
दरअसल, नए प्लास्टिक बोरे पेट्रोलियम उत्पादों से तैयार किए जाते हैं। मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में पेट्रोलियम की आपूर्ति में आई कमी के चलते प्लास्टिक उद्योग प्रभावित हुआ है। इसका सीधा असर यह हुआ है कि नए बोरे पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं और स्थानीय स्तर पर उनका निर्माण भी ठप पड़ गया है।

चंदौली में इस वर्ष प्रशासन ने 67 खरीद केंद्रों के माध्यम से गेहूं खरीदने की योजना बनाई है। हालांकि, बोरे की अनुपलब्धता इस पूरी प्रक्रिया में बड़ी बाधा बनकर सामने आई है। पहले जहां नए प्लास्टिक बोरों में गेहूं की पैकिंग की जाती थी, वहीं अब इस व्यवस्था में बदलाव करना पड़ रहा है।

पुराने बोरों से चल रही अस्थायी व्यवस्था
स्थिति को संभालने के लिए जिला प्रशासन ने वैकल्पिक व्यवस्था लागू की है। अब गेहूं की खरीद पुराने बोरों में ही की जा रही है। इसके लिए कोटेदारों और राइस मिलरों से पुराने बोरे खरीदे जा रहे हैं, ताकि खरीद प्रक्रिया जारी रह सके और किसानों को अपनी उपज बेचने में किसी प्रकार की परेशानी न हो। यह कदम फिलहाल अस्थायी समाधान के रूप में अपनाया गया है।

पुराने बोरों के इस्तेमाल से गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर चिंताएं स्वाभाविक हैं। हालांकि प्रशासन का कहना है कि उपयोग में लाए जा रहे बोरों की जांच के बाद ही उनका इस्तेमाल किया जा रहा है, ताकि गेहूं की गुणवत्ता पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

वैश्विक संकट का स्थानीय असर
चंदौली में गेहूं खरीद पर बोरे की कमी का यह संकट इस बात का उदाहरण है कि अंतरराष्ट्रीय घटनाएं किस तरह स्थानीय कृषि व्यवस्था और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकती हैं। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आई बाधाएं अब सीधे किसानों और खरीद तंत्र तक पहुंच रही हैं, जिससे प्रशासन को त्वरित और वैकल्पिक उपाय अपनाने पड़ रहे हैं।

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