Jhansi News: आईआरएस अधिकारी प्रभा भंडारी की जमानत अर्जी खारिज, घूसखोरी मामले में बढ़ीं मुश्किलें

Jhansi News: आईआरएस अधिकारी प्रभा भंडारी की जमानत अर्जी खारिज, घूसखोरी मामले में बढ़ीं मुश्किलें

Jhansi News: झांसी में तैनात रहीं भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) की अधिकारी प्रभा भंडारी की कानूनी परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। जीएसटी घूसखोरी मामले में अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट का यह फैसला ऐसे समय आया है जब केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की जांच में इस मामले से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं।

घूसखोरी के आरोप में कार्रवाई

प्रभा भंडारी पर आरोप है कि उन्होंने जीएसटी चोरी के एक मामले को निपटाने के लिए व्यापारियों से करीब डेढ़ करोड़ रुपये की रिश्वत मांगी थी। यह मामला झांसी के नवाबाद थाना क्षेत्र के झोकनबाग स्थित जय दुर्गा हार्डवेयर फर्म से जुड़ा हुआ है।

बताया जाता है कि 18 दिसंबर 2025 को प्रभा भंडारी के नेतृत्व में केंद्रीय जीएसटी (सीजीएसटी) की टीम ने उक्त फर्म पर छापा मारा था। छापे के दौरान टैक्स गड़बड़ी सामने आई थी, जिसमें करीब 13 करोड़ रुपये की वसूली का मामला बन रहा था। टीम छापेमारी के दौरान तीन बोरे दस्तावेज अपने साथ ले गई थी।

रिश्वत की मांग और सीबीआई का जाल

छापेमारी के बाद मामले को निपटाने के लिए डेढ़ करोड़ रुपये की रिश्वत मांगे जाने का आरोप है। इसमें पहली किस्त के रूप में 70 लाख रुपये दिए जाने की जानकारी सामने आई थी।

इस पूरे घटनाक्रम की सूचना सीबीआई को मिल गई थी। इसके बाद सीबीआई ने अधिकारी को रंगे हाथ पकड़ने के लिए जाल बिछाया। जांच में यह भी सामने आया कि प्रभा भंडारी पर अपने छह महीने के कार्यकाल के दौरान ही घूसखोरी के आरोप लग चुके थे।

सहयोगियों और अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी

जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि प्रभा भंडारी ने अपने कार्यालय का काम सुपरिटेंडेंट अनिल तिवारी और अजय शर्मा को सौंप रखा था। 68 लाख रुपये का फ्लैट खरीदने के मामले में भी वह जांच एजेंसियों के निशाने पर आईं।

सीबीआई ने कार्रवाई करते हुए प्रभा भंडारी के साथ दोनों सुपरिटेंडेंट को भी गिरफ्तार किया। इसके अलावा फर्म के मालिक राजू मंगनानी और वकील नरेश कुमार गुप्ता को भी इस मामले में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।

हाईकोर्ट ने जमानत देने से किया इंकार

प्रभा भंडारी की ओर से लखनऊ बेंच हाईकोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की गई थी। इस पर सुनवाई करते हुए जस्टिस राजीव सिंह की पीठ ने जमानत देने से इनकार कर दिया।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि रिश्वत के लेनदेन से कथित तौर पर जुड़ी बातचीत की रिकॉर्डिंग समेत उपलब्ध साक्ष्य जमानत के लिए पर्याप्त आधार नहीं बनाते हैं। कोर्ट ने यह भी माना कि जीएसटी चोरी के मामले को निपटाने के लिए व्यापारियों से डेढ़ करोड़ रुपये रिश्वत मांगे जाने के आरोप गंभीर हैं।

इस फैसले के बाद प्रभा भंडारी और इस मामले से जुड़े अन्य आरोपियों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।

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