
UP Politics: मायावती का ‘ब्राह्मण कार्ड’! यूपी चुनाव के लिए बीएसपी का पहला टिकट फाइनल, कद्दावर नेता पर दांव
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव में अभी करीब एक साल का समय शेष है, लेकिन राजनीतिक दलों ने अभी से अपनी चुनावी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। लंबे समय से सत्ता से बाहर चल रहीं Mayawati इस बार खास तौर पर सक्रिय नजर आ रही हैं। उन्होंने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि उनकी पार्टी अकेले दम पर चुनाव मैदान में उतरेगी। इसी क्रम में बहुजन समाज पार्टी ने प्रत्याशियों के नाम घोषित करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
आशीष पांडेय पर दांव, माधौगढ़ से पहला टिकट
बहुजन समाज पार्टी ने आगामी विधानसभा चुनाव के लिए पहला टिकट ब्राह्मण समुदाय के नेता आशीष पांडेय को दिया है। उन्हें जालौन जिले की माधौगढ़ सीट से उम्मीदवार बनाया गया है और साथ ही इस सीट का प्रभारी भी नियुक्त किया गया है।
माधौगढ़ को बीएसपी का मजबूत गढ़ माना जाता है। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में पार्टी यहां दूसरे स्थान पर रही थी। पार्टी सूत्रों के अनुसार होली के बाद कानपुर मंडल की पांच और सीटों पर प्रभारियों की घोषणा की जाएगी। आमतौर पर बीएसपी जिन नेताओं को पहले प्रभारी घोषित करती है, वही आगे चलकर आधिकारिक प्रत्याशी बनाए जाते हैं।
ब्राह्मण मतदाताओं को साधने की रणनीति
पहला टिकट ब्राह्मण उम्मीदवार को देकर मायावती ने स्पष्ट संकेत दिया है कि इस बार पार्टी ब्राह्मण मतदाताओं को साधने की रणनीति पर काम कर रही है। हाल के महीनों में उन्होंने कई सार्वजनिक मंचों से ब्राह्मण समाज की उपेक्षा का मुद्दा उठाया है।
7 फरवरी को हुई एक अहम पार्टी बैठक के बाद मायावती ने कहा था कि मौजूदा सरकार में सभी वर्ग परेशान हैं, लेकिन ब्राह्मण समाज उपेक्षा और असम्मान के खिलाफ अधिक मुखर होकर सामने आ रहा है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि उच्च जातियों, विशेषकर ब्राह्मण बिरादरी को जितना सम्मान, प्रतिनिधित्व और सुरक्षा बीएसपी सरकार के दौरान मिला, क्या वैसा किसी अन्य दल ने दिया?
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इन बयानों को ब्राह्मण मतदाताओं को दोबारा पार्टी से जोड़ने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
‘घूसखोर पंडत’ फिल्म पर कड़ा रुख
हाल ही में ‘घूसखोर पंडत’ नामक फिल्म को लेकर भी मायावती ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह के शीर्षकों से ब्राह्मण समाज का अपमान हो रहा है और केंद्र सरकार से ऐसी फिल्मों पर प्रतिबंध लगाने की मांग की। अपने आधिकारिक सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने कहा कि फिल्मों में पंडितों को नकारात्मक रूप में दिखाना पूरे समाज का अपमान है और इससे व्यापक रोष पैदा हो रहा है।
2007 की सोशल इंजीनियरिंग दोहराने की तैयारी
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मायावती 2027 के चुनाव में 2007 की सोशल इंजीनियरिंग रणनीति को दोहराने की कोशिश कर रही हैं। वर्ष 2007 में उन्होंने दलित और ब्राह्मण वोट बैंक को साथ लाकर पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी।
अब एक बार फिर वह दलित-ब्राह्मण समीकरण को मजबूत कर सत्ता में वापसी की रणनीति पर काम कर रही हैं। आने वाले महीनों में टिकट वितरण और संगठनात्मक फेरबदल से उनकी चुनावी रणनीति और अधिक स्पष्ट हो सकती है।

